Wednesday, September 6, 2017

हाइकु -गौरी लंकेश के नाम



हाइकु 


तुम्हारा जाना
एक और आघात
सत्य जयते।

हत्या का दौर
सूरत सत्य की
रक्तरंजित।

ये उन्माद
बोलेगा कब तक
सरचढ़कर।

सब होकर
आसान नहीं होता
'गौरी' हो जाना।


कलम तोड़ी
गोलियों-बारूदों ने
केवल भ्रम।

नम आँखों से
अलविदा तुम्हें
गोरी लंकेश।


मीना पाण्डेय 

1 comment:

  1. गौरी
    तुम कभी थी भी,
    ये पता भी नही चलता।।
    मानवता ,साहित्य के लिए
    तुमने पता नही ,क्या -क्या किया होगा?
    राम ही जाने(माफ करना राम)।।
    तुम्हारा धर्म,औऱ नाम भी खा गए
    सेक्युलर गिद्ध
    गौरी लंकेश पेट्रिक।।
    सर्वधर्म समभाव का मर्म न समझ सकी।।
    और मुर्दा परस्तों के देश ने तुम्हें
    टेरेसा बना दिया।।
    कॉपीराइट-हेम बहुगुणा

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