स्मृतियों में मोहन उप्रेती
पुस्तक -स्मृतियों में मोहन उप्रेती
प्रकाशक- मोहन उप्रेती लोक संस्कृति एवम विज्ञानं शोध समिति
पृष्ठ -173
मूल्य -350 /-
डॉ दीपा जोशी की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक 'स्मृतियों
में मोहन उप्रेती ' लोकनाट्य संगीतकार मोहन उप्रेती के व्यक्तित्व व् सांगीतिक यात्रा पर प्रकाश डालती है। डॉ यशोधर मठपाल द्वारा बनाये गए मनमोहक आवरण चित्र में स्व उप्रेती को हुड़के के साथ नृत्य मुद्रा में दिखाया गया है। पुस्तक चार महत्वपूर्ण खण्डों में विभाजित हैं जिसमे स्व उप्रेती के विस्तृत जीवन परिचय , योगदान,
उनके द्वारा संगीतबद्ध गीतों व् गाथाओं के स्वरलिपियों सहित अंश तथा मोहन उप्रेती के साथ काम कर चुके रंगकर्मियों व् विद्वानों के संस्मरणों को स्थान दिया गया है। पुस्तक के अंतिम भाग में मोहन उप्रेती जी की कला यात्रा व् लेखिका के शोध के दौरान की गयी यात्राओं व् मुलाकातों से सम्बंधित चित्रावली को दर्शाया गया है।
लोकसंगीत के क्षेत्र में अपने विशेष योगदान के लिए तो उप्रेती जाने जाते ही हैं मगर हिंदी रंगमंच संगीत के विकास में भी उनकी बड़ी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेखिका स्वयं कहती हैं - ' मोहन उप्रेती को मात्र बेडु पाको बारामासा की लोकप्रियता तक सीमित करना, एकांगी होना है।' पुस्तक में कला जगत के जाने माने हस्ताक्षर--- ब.व.कारंत,
रामगोपाल
बजाज, एम.के . रैना,
पंचानन
पाठक ,
कीर्ति
जैन ,
सुरेश भारद्धाज,
जयदत्त
पंत ,
अशोक वाजपेई ,
विनोद नागपाल ,भास्कर चंद्रावरकर, गिरीश तिवारी गिर्दा, डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल , प्रसन्ना , पंकज सक्सेना,
बृजेन्द्र लाल शाह, पंडित बिरजू महाराज, डॉ. पूर्णिमा पांडे,
विधा सागर नौटियाल , रोहिनीहटंगड़े, शम्सुल इस्लाम,
लोकेन्द्र त्रिवेदी ,
डॉ. पी. सी. जोशी, डॉ. गोविन्द चातक,
मुन्ना शुक्ला ,
सांत्वना निगम,
गिरीश रस्तोगी,
सुरेखा सीकरी,जयदेव तनेजा, विश्व मोहन बडोला , तिग्मांशु धुलिया ,
पीताम्बर देवरानी ,
इरफ़ान खान ,
रघुवीर यादव ,
सुषमा सेठ,
भैरव तिवारी ,
डॉ. उमा शंकर सतीश, डॉ. नारायण दत्त पालीवाल, जीत सिंह नेगी, जुगल किशोर पेठशाली , प्रदीप वेडरेकर ,
शबनम मेहरा,
रवि झाकल ,
अलोक नाथ,
भारती शर्मा ,उत्तरबावरकर,
रंजीत कपूर,
हिमानी शिवपुरी,
सीमा विश्वास ,
विपिन चंद्र जोशी आदि के संस्मरणों को स्थान दिया गया है।
इस नाते मोहन उप्रेती के व्यक्तित्व व् कार्यों की जानने समझने की चाह रखने वालों के लिए ये एक जरुरी पुस्तक बन पड़ी है। नृत्य -संगीत में आधिकारिक दखल रखती लेखिका का यह शोध व् उप्रेती के संगीत पर महत्वपूर्ण टिपण्णी संगीत व् रंगमंच के विद्यार्थीयों का पथ प्रदर्शन करती प्रतीत होती है। मोहन उप्रेती से जुड़े उनके मित्रों व् सहकर्मियों के संस्मरण कई अनछुए पहलुओं की उजागर करते हैं ।एक उपयोगी पुस्तक के लिए लेखिका को साधुवाद
चर्चाकार -मीना पाण्डेय
