सवाल ये है
सवाल कुछ करने
न करने का
कहाँ है साहब
सवाल ये भी नहीं
कि वो
मदर टेरेसा थी
या कुछ और
,
वो एक अच्छी
पत्रकार भी थी
या नहीं।
सवाल तो ये है
असल सवाल ये है
क्या बोलने पर
हत्या हो जानी चाहिए ?
कमजोरी पर बात
हो तो
जुबान छीन ली
जानी चाहिए ,
उसकी मृत्यु पर
हम अफ़सोस करते
न करते
हमारे संस्कार
हमें हत्या पर
बोलने को
विवश करते हैं।
मीना पाण्डेय
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