दोहे
नीरव अँधेरी रात में , दीपक दिशा दिखाए।
गुरूवर की महिमा कही, शब्दों में न जाए।।
तमस , झूठ , पाखण्ड से, सुंदर सत्य की ओर।
गुरु घने अंधेरे में , जैसे उज्जवल भोर।।
उच्चतम हो चिंतन मनन , और सादा संधान।
लाखों में हो जाती है , सद्गुरु की पहचान।।
शिक्षक जब से लोभी हुए , शिक्षा हुई व्यापार।
सपनें बंजर हो गए , हुई उम्मीदें बाँझ।।
घृणा ,द्वैष ,अभिमान का , बीज कभी न बोए ।
प्रेम दीप जब भी जले, जग उजियारा होय।।
मीना पांडेय

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