Tuesday, September 5, 2017

मीना के दोहे -शिक्षक दिवस पर

   
                   

                              दोहे 


नीरव अँधेरी रात  में   , दीपक  दिशा दिखाए। 
गुरूवर की महिमा कही,  शब्दों में न जाए।।



तमस  , झूठ , पाखण्ड से, सुंदर सत्य की ओर। 
गुरु  घने अंधेरे  में ,    जैसे उज्जवल भोर।।



उच्चतम हो चिंतन मनन , और  सादा संधान। 
लाखों में हो जाती है , सद्गुरु की पहचान।।



 शिक्षक जब से लोभी हुए , शिक्षा हुई व्यापार।
 सपनें बंजर हो गए ,   हुई उम्मीदें बाँझ।।



घृणा ,द्वैष ,अभिमान का , बीज कभी न बोए । 
प्रेम दीप  जब भी जले, जग उजियारा होय।।


 मीना पांडेय 





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