अमृता प्रीतम के नाम
तुम फिर आना अमृता
प्रेम की एक
नई इबारत
गढ़ने
लिखने ,कहने
और
उससे बहुत पहले
जीने
प्रेम का
एक
-एक लम्हा,
तुम लेकर वही
खुशशक्ल चेहरा,
मोहरा
सवाल पूछती
जवाब देती
दो आँखों का
पैनापन ,
फिर
आना अमृता
कि
तुम्हारी
खुली किताब जिंदगी
बंद किताबों में
सबसे ज्यादा
खंगाली
जाती है ,
तुम प्रेम का संकीर्तन
साहिर की बिसरी नज़्म
या इफरोज का कैनवास
अब दुनिया तुम्हें
इससे
अलग
बांचना
चाहती है ।
-मीना पाण्डेय

Bahut sundar
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