Thursday, August 31, 2017

अमृता प्रीतम के नाम




अमृता प्रीतम के नाम

तुम फिर आना अमृता
प्रेम की एक 
नई इबारत 
गढ़ने
लिखने ,कहने 
और
उससे बहुत पहले
जीने
प्रेम का
एक -एक लम्हा,

तुम लेकर वही
खुशशक्ल चेहरा,
मोहरा
सवाल पूछती
जवाब देती
दो आँखों  का
पैनापन ,

फिर आना अमृता
कि तुम्हारी
खुली किताब जिंदगी
बंद किताबों में
सबसे ज्यादा
खंगाली जाती है ,

तुम प्रेम का संकीर्तन
साहिर की बिसरी नज़्म
या इफरोज का कैनवास

अब दुनिया तुम्हें
इससे अलग
बांचना चाहती है  ।


-मीना पाण्डेय

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