एक शब्द वक़्त बेवक़्त मेरे इर्द गिर्द रहता है|
या टूट के बिखरा हुआ
या रूप सा निखरा हुए
एक दर्द की बारिश मे सींचा हुआ गुलाब लगे
तो एक प्रेम की बोछार मे भीगा हुआ गुलाब लगे ;
एक विगत स्वप्न से आहत सा
एक भावी स्वप्न मे खोया सा ;
प्रेम को मैंने जीते देखा है
प्रेम को मैंने मरते भी
प्रेम को मैंने हँस ते देखा है
प्रेम को मैंने रोते भी
अगर माने यही प्रेम की सम्पूर्णता का सार है।
तो मान लीजिये ऐसा प्रेम कभी मरता नहीं।
जनम लेता हर युग मे सौ बार है।
या टूट के बिखरा हुआ
या रूप सा निखरा हुए
एक दर्द की बारिश मे सींचा हुआ गुलाब लगे
तो एक प्रेम की बोछार मे भीगा हुआ गुलाब लगे ;
एक विगत स्वप्न से आहत सा
एक भावी स्वप्न मे खोया सा ;
प्रेम को मैंने जीते देखा है
प्रेम को मैंने मरते भी
प्रेम को मैंने हँस ते देखा है
प्रेम को मैंने रोते भी
अगर माने यही प्रेम की सम्पूर्णता का सार है।
तो मान लीजिये ऐसा प्रेम कभी मरता नहीं।
जनम लेता हर युग मे सौ बार है।
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अरुणा शानबाग को श्रद्धांजली -
क्या ज़िन्दगी थी वो, क्या मौत है
सब का साथ था ये और बात है
सोई रही मैं बरस के बरस
क्या जवानी थी वो,क्या बुढ़ापा है।
रूह कुचल चुकी थी
साँस रह रह के चल रही थी
फिर भी मन के भीतर
कोई बात चल रही थी
क्या सैतान था वो,क्या इंसान है ये
जा रही हूँ छोड़ के मेरे अपने है कुछ
खून का न सही रूह का रिश्ता है
मगर जा रही हूँ छोड़ के
क्या दुनिया थी वो, क्या दुनिया होगी वो।
सब का साथ था ये और बात है
सोई रही मैं बरस के बरस
क्या जवानी थी वो,क्या बुढ़ापा है।
रूह कुचल चुकी थी
साँस रह रह के चल रही थी
फिर भी मन के भीतर
कोई बात चल रही थी
क्या सैतान था वो,क्या इंसान है ये
जा रही हूँ छोड़ के मेरे अपने है कुछ
खून का न सही रूह का रिश्ता है
मगर जा रही हूँ छोड़ के
क्या दुनिया थी वो, क्या दुनिया होगी वो।
किरन पांडेय पंत

हल्द्वानी ,उत्तराखंड
very nice ,keep it up
ReplyDeletebahut bahut sukriya
ReplyDeleteVery nice...
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteBahut khoob likha hai Aapne.. (Y)
DeleteDhanywad ji
DeleteThanku kamal
DeleteThanku kamal
Delete👌
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteBeautiful.. lovely peace of work..
ReplyDeleteKeep going..:)
Full support from my side.. :)
Thankuu
DeleteNice lines...gud going dear all d best..
ReplyDeleteThankuu rasmi
DeleteBeautifully compose.
ReplyDeleteWell done ki ki ki kiran
Tu to hai kavita ki kiran
Thanks di
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteSunder or uttam rachna
ReplyDeleteऔर अच्छी कविता बन सकती थी
ReplyDeleteMargdarsan pradan kare
DeleteMargdarsan pradan kare
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