भाषा नदी है
धाराओं से समृद्ध
सीमा में असीमित बहते हुए
बहा ले जाती है
तमाम मौखिक-लिखित असुविधाएं,
दुविधाएं
नदी की तरह
भाषा की भी कोई सरहद नहीं होती
सीमाएं लांघकर
अपने गन्तव्य तक पहुंचती है भाषा
जहां नहीं पहुंचती वहां उसकी पैकेजिंग पहुंचती है
भाषा नदी है
जिसके जल को
मुहँ में भीतर तक गुड़गुड़ा
जहन की बेस्वादी धोई जा सकती है
अपनी यार भाषा में
जबडे से जेहन तक गटका जा सका
समय का सबसे विषाक्त रूपक
सबसे अश्लील मुहावरा
पढ़ा लिखा जिस भी भाषा में गया
मस्तिष्क से स्नायुओं तक
मातृभाषा में ही ढुकेला जा सका है
हिन्दी मेरे जायके की सबसे लजीज भाषा रही
जिस में घुल कर
किसी भी जुबान में
असर आया है
मीना पाण्डेय
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