यदि आप इंसान है तो हैरान होना जरुरी है। बड़े मियां आज के दौर में आदमी होने की शर्त ही है कदम कदम पर खुद को हैरानियों के लिए तैयार रखना। बाफुर्सत औरतें और बेरोजगार जो पिछले दिनों आलिया-रणवीर की वैडिंग ड्रेस और प्रियंका चौपड़ा के निक को देखकर हैरान थे वो आजकल इंडिया की बल्लेबाजी पर हैरान हैं।
यकीन मानिए हैरान होना दुनिया का सबसे आसान काम है। कहीं भी, किसी भी बात पर हैरान हुआ जा सकता है। तब भी जब और कुछ न किया जा सके हैरान तो हुआ ही जा सकता है। इस पर भी सबसे अच्छी बात यह कि सरकार का ध्यान भी इस गैर मामूली इंसानी आदत पर अभी तक नहीं गया। कौन जाने इस पर भी मनोरंजन टैक्स की तर्ज़ पर हैरान टैक्स जैसा कोई नया कर ही लगा दिया जाय। फिलहाल तब तक जमकर और बेफिक्र हैरान हो लिजिए।
कुछ गप्पबाजों की दुकानें ही इस एक बेशकीमती हुनर पर टिकी रहती हैं। फलां फलां की कमाई, फलां व्यक्ति ने किया कारनामा या फलां की बेटी फलां के साथ रफूचक्कर। आंखें फाड़कर हथेली को गालों पर टिका लिजिए। यदि आप इस के साथ मुंह भी फाड़ सकते हैं तो आप में एक उम्दा हैरान शख्स बनने की सारी काबिलियत है। गाहे-बगाहे इस प्रक्रिया को दोहराते रहना भी जरूरी है, आखिर अभ्यास नाम की भी कोई चीज होती है कि नहीं। स्थान के अनुरूप हैरान होने के तरिकों में कुछ भिन्नता देखने को मिलती है। यदि आप शहरों में रहते हैं तो थोड़ा सा आंखें फाड़कर और छोटा-सा मुंह खोल कर हैरान हुआ जा सकता है लेकिन यदि आप किसी गांव या कस्बे में रहते हैं तो आप को हैरान होने के लिए ज्यादा मस्सकत करनी होगी। हैरान होने की आदत व्यक्ति सापेक्ष या घटना सापेक्ष होती है यानि एक बात या घटना जो आपको हैरान कर रही है, हो सकता है कि वो दूसरे के लिए सामान्य सी बात हो।
बहरहाल, आज की जय श्री राम और अल्लाह हो अकबर राजनीति में भी हैरान होने के किस्से कम नहीं है। यहां हैरान होने से ज्यादा हैरान किया जाता है। आज की राजनीति किस तरफ जा रही है या सारी शाखों पर उल्लू ही क्यों बैठें हैं? इस बात पर यहां कम हैरानी होती है। यहां इस पर भी हैरानी नहीं होती कि पिछत्तर सालों में केवल पैकेजिंग ही क्यों बदलती रही? हैरान होने की वजह यहां अनर्गल बयान भी नहीं होते। हैरान होने की वजहें यहां प्रियंका वाड्रा, अमेठी और अमित शाह जैसी बड़ी होती हैं। हम मोदी के कपड़ों और राहुल के लड़कपन पर हैरान होते हैं। रसोई गैस व पैट्रोल के बड़े हुए दाम हमें परेशान तो करते हैं हैरान नहीं। हम हैरान होते हैं इस बात पर कि इंदिरा गांधी से हूबहू कैसे मिलती है उनकी पोती की शक्ल? मुहल्ले की सबसे काबिल और खूबसूरत लड़की के तेजाब जले चेहरे को देख हमें हैरानी नहीं होती।
हैरान होना दुनिया का सबसे खूबसूरत काम तब हो जाता है जब आपकी हैरानी आपको परेशान करने लगती है।
मीना पाण्डेय
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