Sunday, September 30, 2018

पुस्तक - ज्ञान चक्षु-आत्मसाक्षात्कार की एक अनूठी श्रृंखला

ज्ञान चक्षु- आत्मसाक्षात्कार की एक अनूठी श्रृंखला
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पुस्तक - ज्ञान चक्षु (आत्मसाक्षात्कार)
लेखक - महेश चंद्र पांडेय
संपर्क - भगवान पुर, हल्द्वानी,नैनीताल
मोबाइल-8630961236


जीवन के विभिन्न पायदानों में नित्यप्रति की चुनौतियों से गुजरता मनुष्य अपने आस पास के परिवेश, संपर्क में आते व्यक्तियों, परिस्थिति,देशकाल और समाज के विभिन्न पक्षों का अवलोकन, निरीक्षण इन स्थूल आंखों से ही करता है।अपने भीतर झांकने का ना तो उसके पास अवकाश ही है और ना ही वो जीवन दृष्टि ही जो भीतर व बाह्य जगत की वास्तविक छवि उसके सम्मुख रख सके। आध्यात्मिक चिंतन मनन वही तीसरा नेत्र अर्थात ज्ञान चक्षु हमें प्रदान करता है जो जीव व जगत के वास्तविक स्वरूप से हमारा परिचय कराता है।महेश चंद्र पांडेय की पुस्तक ज्ञान चक्षु  आत्मसाक्षात्कार की वह अनूठी श्रृंखला है जो स्वयं व परमात्मा के परिचय के साथ,ज्ञान के प्रयोजन व आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से विश्व एकता का संदेश भी सामने रखती है।
सीमित कलेवर की 38 पृष्ठिय यह पुस्तक इस अर्थ में एक जरूरी पुस्तक है कि यह परंपरावादी व कर्मकांडी विचारधारा से पृथक आध्यात्मिक चेतना का तथ्यपरक व वैज्ञानिक सुझाव पाठक को सौंपती है।अनेक विचारकों, चिंतकों के विचारों का अध्ययन, चिंतन, मनन कर इस पुस्तक को विस्तृत फलक लेखक द्वारा दिया गया है।इस कारण इस पुस्तक की महत्ता और बढ़ जाती है।
पुस्तक के पूर्वकथन में अपनी बात शीर्षक से उस परमसत्ता की तरफ संकेत करते हुए लेखक लिखते हैं  'मनुष्य की शक्तियां सीमित हैं,वह जो कुछ भी सोचता है, करता है उसमें अपूर्णता रह जाती है। इसलिए वह एक ऐसी शक्ति को खोजने में लगा रहता है, जिसके सामने वह अपनी अपूर्णता को स्वीकार करता हुआ पूर्णता की ओर अग्रसर हो।'
अपूर्णता से पूर्णता की इस महायात्रा में स्वयं व ईश्वर के वास्तविक विराट स्वरूप से उसका परिचय होता है। मनुष्य ईश्वर की श्रेष्ठ कृति है मगर क्रोध, छल, कपट, द्वेष,मोह, अहंकार आदि विकारों के वश होकर आज उसकी स्थिति बहुत निकृष्ट हो गई है।यह अनुपम कृति आज विकारों के कारण पतन कि ओर अग्रसर है।
पुस्तक सात अध्यायों में विभक्त है जिसमें बड़े ही समीचीन तरीके से ईश्वर की श्रेष्ठ कृति मनुष्य, सृष्टि चक्र के चरण, आत्म ज्ञान, परमात्मज्ञान,समय की महत्ता,ज्ञान के प्रयोजन व अध्यात्म के माध्यम से विश्व एकता संदेश इत्यादि विषयों पर प्रकाश डाला गया है।ज्ञान की महत्ता को बताते हुए लेखक लिखते हैं- " ज्ञान का संबंध हमारे तंत्रिका तंत्र से जुड़ा होता है, तंत्रिका तंत्र के माध्यम से आत्मा का संदेश शरीर के विभिन्न  कर्मेंद्रियों तक पहुंचता है।"
पुस्तक में विभिन्न उद्धरणों के माध्यम से जटिल तथ्यों को बड़ी ही सहजता के साथ तथा पौराणिक आख्यानों व प्रसंगों को तथ्यपरक ढंग से समझाया गया है।बेहद पठनीय शैली में लिखी गई यह पुस्तक पाठक की चेतना को अंतिम पृष्ठ तक आते आते आध्यात्मिक रूप से समृद्ध तो करती ही है साथ ही विस्तृत चिंतन के लिए प्रोत्साहित भी करती है।इस नाते ज्ञान चक्षु चिंतनशील पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।लेखक को साधुवाद।


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