Sunday, October 21, 2018

बधाई हो- सिनेमा


ऑफबीट सिनेमा का पर्याय बन चुके आयुष्मान खुराना की नई फिल्म बधाई हो नए कथानक व दमदार अभिनय के साथ  सिनेमाप्रेमियो के दिलों में जगह बना गई। हंसते हंसते कब आंख की कोर भीग जाती है पता नहीं चलता।नीना गुप्ता, आयुष्मान खुराना, सान्या मल्होत्रा व गजराज राव जैसे कलाकारों का अभिनय चार चांद लगा गया मगर इन सब पर भारी पड़ी सुरेखा सिकरी अपने दमदार अभिनय और तीखे संवादों से सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। बेहद चुटिले संवाद, रोचक कथानक और सशक्त अभिनय इन तीनों का सुखद मेल है बधाई हो । आयुष्मान ऐसे अभिनेता है जो आर्ट और व्यावसायिक सिनेमा के मध्य की खाई को पाटने में सर्वथा सक्षम दिखाई देते हैं।यहां पर भी उन्हें नकुल के किरदार में देखना अच्छा लगा। पचास के पार मां यदि प्रेगनेंट हो जाती है तो परिवार, बच्चों व समाज की क्या प्रतिक्रिया होती है उसे बखूबी परदे पर उतारती फ़िल्म है बधाई हो। जीवन के जिस कोने में सेंध लगाने का प्रयास यह फिल्म करती है वो जगहें अनदेखी- अनछुई  इसलिए भी रह जाती हैं क्योंकि उनको सिनेमा जैसे माध्यमों के द्वारा उतारने के शिल्प व परोसने के जोखिम को उठाने  से परहेज़ किया जाता रहा है। नए और अलग विषयों को  पर काम करते हुए सिनेमा को सिनेमा की तरह उतारा जाना जहां ढाई घंटे का पैसा वसूल मनोरंजन देने के साथ आप चुपके से अपनी बात भी दर्शकों तक पहुंचा दें,तब आर्ट और कामर्शियल के एक्सक्यूज पीछे छूट जातें है।आज फिल्मी कॉमेडी इस हल्के अंदाज़ में पहुंच चुकी है कि दशकों को हंसाने के लिए कलाकार बेमतलब की उठापटक करते या थप्पड़,घूसे बरसाते दिखाई देते हैं।इन सब से इतर बधाई हो में गुदगुदाते संवाद हैं और बेहतरीन कॉमेडी एक्सप्रेशन टाइमिंग।कई बार आप केवल कलाकारों की मुखाकृति या परिस्थिति देखकर ही मुस्कुराने लगते हैं।कुल मिलाकर एक अच्छी फिल्म के लिए निर्देशक अमित शर्मा और राइटर अक्षत घिल्डियाल दोनों बधाई के पात्र हैं।

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